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पंचायत दिवस पर सन्देश

Rajesh Tandon, Founder-President, PRIA attended the Panchayat Day celebrations in Lucknow. It's been 24 years since panchayati raj institutions were constitutionally mandated. How many more years before real decentralisation and commitment to the people becomes a reality?


इस वर्ष पंचायत दिवस 24 अप्रैल को लखनऊ में मनाया गया, और उत्तर प्रदेश के नए मुख्य मंत्री श्री योगी आदित्यनाथ उसमे मुख्य अतिथि थे. देश भर से आये लगभग 700 पंचायत प्रतिनिधियों के अलावा उत्तर प्रदेश के हजार प्रतिनिधि थे. पुरस्कार वितरण के पहले योगी जी का भाषण हुआ.

योगी जी ने कई बातें बड़ी रोचक कहीं:
• सभी जन प्रतिनिधियों को विश्वसनीयता का संकट झेलना पड़ रहा है. अब बिना विकास का काम किये गाड़ी नहीं चलने वाली है.
• जन प्रतिनिधियों को आधुनिकता से जुड़ना पड़ेगा अन्यथा वह पीछे छूट जायेंगे, और लोग आगे बढ़ जायेंगे.
• ग्राम पंचायतें विकास और जनतंत्र की नीव हैं, और ग्राम सभा उसकी धुरी. धुरी तेज तो नीव मजबूत होगी.
• स्मार्ट गाँव स्वावलंबी होंगे, जहाँ पानी और जमीन की अच्छी व्यवस्था हो. यदि बिजली मिलती है तो मीटर लगायें और बिल भरें.
• मेरी सरकार पंचायतों और स्वयं-सेवी संस्थायों के सहयोग से उत्तर प्रदेश में विकास लाने के लिए कटिबद्ध है.

योगी जी के इस सटीक भाषण के दौरान 3-4 बार ‘भारत माता की जय’ के नारे भी गूंजे.

पर उत्तर प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधि ‘मानदेय बढाया जाये’ के नारों में ही उलझे रहे. भत्ता और मानदेय इतने हावी हो गए की ठीक ढंग से पुरस्कार भी न बट पाए.

पंचायती व्यवस्था को संवेधानिक ढांचा मिले चौबीस वर्ष हो गए. इन वर्षों में उत्तर प्रदेश में चर्चा सिर्फ भत्ते और मानदेय तक ही पहुंची लगती है. काम और विकास पर बात होगी कब?

जनता कब तक और इंतजार करेगी? जनतंत्र के नाम पर यह मजाक और कितना खिचेगा?

योगी जी भी कुछ कर दिखायेंगे क्या? या फिर यह नीव उतनी ही खोखली रहेगी?

 

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