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Feature Story                                

कोई मुझे भी सुनता है

PRIA is working with local communities in the blocks of Siwana and Samdari in Barmer district of Rajasthan to help them engage with issues related to Maternal and Adolescent health. The aim is to facilitate the creation of participative Gram Panchayat Health Sub-plans which will be part of the overall Gram Panchayat Development Plan (GPDP). The effort is to create an environment where this work can become a model for developing participative planning, ushering in health reforms in rural Rajasthan.

Our animators are the hands and feet of our work in the field. They have been recruited from the local areas where the work is being implemented. Their local knowledge is their greatest asset, which they use to build an environment of trust with the communities. Capacity building of animators is an important part of our work, to enable them to sustain the change beyond the project implementation period.

Prem Kumari, field animator in Siwana block, Rajasthan, describes her journey from the villages of Siwana to Jaipur, which was the first time ever left the physical limits of Siwana block. She makes observations about her work and what she has learnt till date. Prem gives us a sense of how her work and the knowledge she has gained till date is helping her go forward as a person and a professional. This short but eventful journey is of a shy village resident to that of a confident professional.





मै प्रिया के साथ जुडने से पहले तक 12 वीं कक्षा की छात्रा थी। और 12 वीं तक भी पढने के लिये मुझे अपने घर में बहुत संघर्ष करना पडा था यह बात मैं जयुर में भी टैªनिंग के दौरान बता चुकी थी। हमारे गांव में या हमारे समाज में लडकियों और महिलाओं को ज्यादा घर से बाहर निकलने की या बात करने की छूट नहीं होती है। मेरी मां मेरी दादी से भी घूॅघट करती है। किसी के सामने कुर्सी पर बैठ नहीं सकती है। मेरी मम्मी आशा का काम करती है और हमारे घर की आर्थिक हालात सही नहीं है। सर ने संस्था और कार्यक्रम के बारें में बताया। मैने भी हां कर दी पर पापा की दिक्कत थी कि वो कैसे हां करेेगे। मम्मी ने पूछा कि कितने पैसे मिलेंगें सर ने पूछा कि आप बता दो कितने मिलने चाहिये। मम्मी और मैनें 1000 की कहा तो सर ने तीन बार कहा कि और सोच लो फिर ऐसा करते करते हम 3000 तक आ गये और यह भी कहा कि किराया अलग होगा। मैं सोच रही थी मेरी मम्मी को मिलते नही इतने पैसे मुझे कैसे मिल जायेंगे। मुझे लगा कि सर मजाक कर रहे है। सर ने फिर पूछा तो मैने कह दिया सर आपको जो सही लगे वो दे देना, मुझे काम करना है तो सर ने 4000 की कहा पर मुझे विश्वास नहीं हुआ और न मम्मी को। घर आकर हमने सोचा कि यह कैसे हो सकता है कि हम कम मांगे और लोग ज्यादा पैसे दे। सर को एक बार फिर फोन किया मम्मी ने रात को सर ने वही बात दोहराई तो हमने पापा को मना लेने का मन बना लिया और पापा को राजी कर लिया। दो दिन का प्रशिक्षण के दौरान सर ने बहुत अच्छे से समझाया जिसकी वजह से मेरी हिम्मत बढी। इस तरह मैं प्रिया के साथ जुड गई। पहले दिन थोडा सी हिचक हो रही थी कि मैने कभी भी इस तरह से फील्ड में जाकर काम नहीं किया था न इस तरह कभी किसी से इस तरह मुलाकात की थी। मम्मी की वजह से मुझे ज्यादा कहीं परेशानी नहीं हुई। जब भी लोगो से बात करती तो मुझे बहुत खुशी होती थी कि मुझे भी कोई सुनता है और जबाब देेते है। सर ने एक दिन मुझे बताया कि मुझे जयपुर जाना है एक दिन की टैªनिंग के लिये। मैं बहुत खुश हुई और दुखी भी। खुशी इसलिये कि पहली बार मैं जयपुर जाकर कुछ सीखने का मौका मिल रहा था और दुखी इसलिये कि घरवाले कैसे तैयार होगें। मम्मी ने हां कर दी और पापा ने भी । मुझे बहुत खुशी हुई  अगले दिन मुझे प्रशिक्षण के बाद आॅफिस जाने का मौका मिला तो वहां पर जो पोस्टर लगे हुये थे वो मुझे बहुत अच्छे लगे और मन हुआ कि मांग कर ले लू पर नहीं मांग पाई। जयपुर तो क्या मै मेरे कस्बे से ही पहली बार अकेली निकली। पर पहली बार मैं ही ये सब हो गया।  मै संस्था के साथ जुडे रहना चाहती हूं कि और इतना काम करना चाहती हूं कि संस्था का नाम और हो। मैं बहुत धीरे बोलती हूं और सभी साथी मिलकर मेरी आवाज को बढाने पर लगे हुये है। सुधार हो रहा है और मुझे विश्वास है कि बहुत जल्दी कडक आवाज में बोल पाउंगी और सबके सामने अपनी बात रख पाया करूगीं।

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