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Feature Story                                

समय के साथ साथ सीखता जा रहा हूॅ मैं

PRIA is working with local communities in the blocks of Siwana and Samdari in Barmer district of Rajasthan to help them engage with issues related to Maternal and Adolescent health. The aim is to facilitate the creation of participative Gram Panchayat Health Sub-plans which will be part of the overall Gram Panchayat Development Plan (GPDP). The effort is to create an environment where this work can become a model for developing participative planning, ushering in health reforms in rural Rajasthan.

Our animators are the hands and feet of our work in the field. They have been recruited from the local areas where the work is being implemented. Their local knowledge is their greatest asset, which they use to build an environment of trust with the communities. Capacity building of animators is an important part of our work, to enable them to sustain the change beyond the project implementation period.

Firoz Khan writes about his inner turmoil and struggle related to getting  a handle on his work. We get a sense of an inner dialogue about his doubts and the arguments he has with himself about the vialbility of staying on with this work. He describes the point after which he begins to understand that all his pain and struggle is leading to a larger good both for himself and the larger community in Siwana. The emergence of a confident professional from the shell of a person filled with self-doubt and unsure of his future in the work being done in Siwana is the highlight of his reflections.



मै प्रिया के साथ जुडने से पहले डीजीटल एमपावरमेन्ट फाउन्डेश्न में सूचना सेवा केन्द्र पर कार्य करता था। जहां पर 6 तरह की श्रेणी सामाजिक सुरक्षा पेंशन, वित्तीय समावेश, आजीविका, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य से जुडी सेवाओं पर काम किया।उसमे मुझे जरूरतमदों की सहायता करने पर बहुत अच्छा लगता था। उसके बाद मेरे एक साथी ने मेरी मुझे प्रिया के बारें में थोडा बहुत बताया और फिर मैंने प्रिया तथा उसके काम करने के तरीको के बारें में जाना। सेलरी कम होने के कारण मैं असंमजस में था कि मैं क्या करू ? इस पर मैंनें दो दिन का समय उनसे मांग लिया। मैने घर आकर इन्टरनेट पर प्रिया के बारें में देखा तो बहुत ज्यादा अंग्रेजी में होने के कारण कुछ ज्यादा समझ में नहीं आया तो मैने अपने एक दोस्त को फोन किया तो उन्होने बताया कि संस्था बहुत बडी है। फिर मैंने जरूरत को देखते हुये और संस्था के अनुभवों और मेरे आगे बढने और सीखने के अवसरों के बारें में सोचते हुये मैंने हां कर दी और 23 मार्च 2017 को प्रिया संस्था को फील्ड एनिमेटर के रूप में जुड गया।प्रिया के दूसरे साथियों से मिलकर बहुत खुशी हुई और घबराहट भी कि ये लोेग तो पहले से ही कार्य कर रहे है ये मुझे कुछ सिखायेंगें या नहीं। दो दिन का प्रशिक्षण के बाद यकीनन मुझे बहुत अच्छा लगा और थोडा सी हिचक हो रही थी कि मैने कभी भी इस तरह से फील्ड में जाकर समुदाय के साथ सीधा काम नहीं किया था न इस तरह कभी अधिकारियो से मुलाकात की थी। मैने भी सोच लिया कि जो होगा देखा जायेगा जब सिर ओखली में दे ही दिया है तो डर कैसा।

मै पहले दो दिन सर के साथ 7 ग्राम पंचायतो में घूमा और अच्छी तरह से सर को बात करते हुये, अपनी बात रखते हुये देखता रहा। मैंने यह भी देखा कि सरपंच सर को बहुत इज्जत दे रहे थे तो मुझे भी मिलेगी। सरपंच बहुत कुछ सवाल कर रहे थे सर से। सर उन्हें सभी सवालों के जबाब दे रहे थे। सर के जाने के बाद मैं अकेला जब फील्ड में गया तो एक बार फिर मुझे बहुत घबराहट हुई। मैं धीरे धीरे अपनी हिम्मत को बढाता गया। मेरा आत्मविश्वास धीरे धीरे बढ रहा था।

मैं जब भी सरपंचो से बात करता तो लगता कि ये लोग मुहं पर बहुत अच्छी अच्छी बाते करते है हां में हां मिलाते है पर सच में ये कुछ करना ही नहीं चाहते है। कहते है कि हम खुद ही सरकार है जो अपनी मर्जी के मालिक है। यह मुझे बहुत दुखी करता था। एक दिन मैं पादरू ग्राम पंचायत गया तो सरपंच ने मुझसे जरा भी अच्छे से बात नहीं की और 3 दिनो तक मुझे टालता रहा। वो आज भी अपने गावं में फिल्म की तरह का ठाकुर है जहां लोग उसके सामने बैठने से भी परहेज करते है बोलना तो दूर। जब वो एक दिन मिला तो उसने मुझे 1 घन्टे तक खडे रखा बाद में उसने बात की सब जानकर फिर मुझे बैठने की कहा। वहां पर जाति प्रथा बहुत हावी है, अमीरी गरीबी भी बहुत प्रभाव रखती है।

मेरे आत्मबल बढता जा रहा है और मैं धीरे सीखता जा रहा हूं और अपने में सुधार करता जा रहा हूं। मुझे प्रिया के साथ जुडकर बहुत अच्छा लग रहा है और मैं लम्बे समय यहां काम करना चाहता हूं। मैं पहली बार इस तरह अपने विचारों को लिख रहा हूं आज से पहले कभी न तो किसी ने कहा और न मैने कोशिश की। बहुत खुश हू मै बहुत खुश ।

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