अमृत की वर्षगांठ पर अमृत की खोज

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अमृत योजना के एक वर्ष कब बीत गये यह पता भी न चला यदि वर्षगांठ नही मनाया जाता तो यही लगता कि अभी तो शुरुआत ही नहीं है किन्तु भला हो वर्षगांठ समारोह का जिससे समय रहते पता चल गया, नगर निगम झांसी ने अमृत के एक वर्ष पुरे होने पर 25 जून को एक समारोह रखा जिसमें पर्यावरण पर विधार्थियों को निबन्ध तथा चित्रकला पर सम्मान्नित किया गया,पेयजल पर संक्षिप्त जानकारी हुयी,साथ ही स्मार्ट सिटी पर सम्बोधन किया गया,एंेसे कार्यक्रमों का आयोजन देष भर में कई स्थानों पर किया गया झांसी मे भी वर्षगांठ मनाया गया जिसमें अमृत के तहत पेयजल संकट से उबरने की कल्पना पर संक्षिप्त जानकारी हुई किन्तु इस जानकारी से परिणाम नहीं निकलते दिखे, बुन्देलखण्ड के षहरी क्षेत्रों व गंावों में लोग प्यासे ही रहे, धरती का अमृत अर्थात शुद्ध पानी अभी भी बहुत लोगों को मयस्सर नहीं अभी तो इस योजना के अन्र्तगत कई करोड़ का डी0पी0आर0 ही भारत सरकार के पास स्वीकृति हेतु गया है जिसमें झंासी के लोगों को पीने के पानी की ब्यवस्था के सपने जुड़े हैं।

1 जबकि इस गर्मी के मौसम में अनेक क्षेत्रों में लोग पानी के टैंकरों पर दिनभर अंाखे विछाये रहते हैं पानी का टैंकर कभी भी किसी भी समय आ सकता है और लोग सभी काम छोड़कर पानी इकठ्ठे करने में जुट जाते हैं। एंेसे समय मेंविभिन्न इलाकों के कई परिवार की नई बहुए अपने मायके और रिष्तेदारों के यहंा चले जाते है और बारिष होने पर वापस लौटते हैं ताकि पानी मिल सकें, आज बदलाव के दौर में विकास तेजी से हो रहा है शहर में गरीब परिवारों के घरों के नजदीक बड़ी- बड़ी बिल्डिगें बनने लगी हैं। इसी दौर से गुजर रहे पिछौर बस्ती के समीप तो नामी कान्सट्रक्षन कम्पनी अंसल समूह की आवासीय योजनायें पनप रही हैं और बडी बिल्डिगें बन गयी है जहंा आवास के साथ पानी ही पानी है किन्तु बगल में पिछौर वासी 65 घरों के लोग हाइवे पर तेज रफतार सरपट भागती गाडियों के बीच बच्चे,बुढ़े और घूंघट में महिलाये सिर पर पानी का इन्तजाम करके खुश हो लेती है। कुछ सदस्यों को इसी इन्तजाम में चोटें लगी गाड़ियो से टकराये भी और उपचार कराके पुनः उसी काम में लग गये।

दूसरा क्षेत्र करगुवां जो झांसी की शान बुन्देलखण्ड विष्वविघालय के पिछले हिस्से में बसा है वहंा भी लोग पेयजल के लिए टैंकरों पर निर्भर है जिसके आने का समय भी तय नहीं है लोग छोटे बडे़ सारे बर्तनों को तैयार करके रखते है,सोते जागते टैंकर ही दिखता है जिसमें अमृत रूपी पानी बन्द रहता है,नगर के एक और क्षेत्र भैरो खिड़की जो कि झंासी का पुराना क्षेत्र है गलियंा संकरी है घनी आबादी है वहंा भी लोग पानी के लिए दौड़ लगा रहे है बस्ती के दो हैण्ड पम्प बिगड़े है लोग मेयर व पार्शद से गुहार लगा रहे है,यंहा भी टैंकर आने लगा है लोगों ने डिब्बे जुटाना षुरू कर दिया ऐसी अनेको कहानियंा कई क्षेत्रों में है एंेसी हालत में लोगों को कुछ सूझता नहीं कोई भी उनके घर आता है किन्तु बहस पानी पर ही षुरू होती जिसका अन्त नहीं होता। इस बात पर हिन्दी कवि रहीम की एक लाइन याद आती हैं “रहिमन पानी राखिये,बिन पानी सब सून”आज इस क्षेत्र में पानी सिर्फ अमृत के समान ही नहीं है बल्कि लोगों के सम्मान पूर्वक जीने की भी बात है। सरकारी प्रयास जारी है जून माह में ही स्मार्ट सिटि अभियान में नागरिको के सुझाव लिये जा रहे थे जिनमे प्रथम स्थान पर पानी का ही मुद्दा छाया रहा लोगों को अमृत योजना से बहुत उम्मीदें हैं खासकर नगर निगम व अन्य हुक्मरानों को किन्तु असली जनता को तो अभी अमृत की तलाष है उन्हें तो पता ही नहीं कि कहंा,क्या और कब होना है ?

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