स्मार्ट सिटी राउंड 2 – मानकों पर कितने खड़े हैं शहर

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स्मार्ट सिटी के चयन हेतु द्वितिय चरण में शामिल सभी प्रतिभागी शहरों ने खूब जोर शोर से प्रचार प्रसार किया ताकि उनका चयन इस चरण में हो सके। मुजफ्फरपुर शहर भी उन्हीं में से एक शहर है। मुजफ्फरपुर शहर में भी नगर निगम, ईकोरिज कंसल्टेंसी एवं प्रिया संस्था द्वारा लोगों और संस्थाओं में जन जागरूकता लाने हेतु विशेष अभियान चलाया गया।

इस अभियान के दौरान कई रोचक बातें भी देखने को मिली और कई समस्याएं भी सामने आई। जहां स्कूल काॅलेजों में इसको लेकर युवाओं में काफी उत्साह दिखा वहीं समाज के निचले तबके के लोग ज्यादा रूचि नहीं ले रहे थे। उनकी समस्या एक ही थी पीने का पानी और नालों से बहता पानी, ताकि सभी घरों को स्वच्छ पीने का पानी मिल सके एवं नालों से जल निकासी की सही व्यवस्था हो जिससे शहर और मोहल्ला झील में तब्दील ना हो।

प्रिया द्वारा चलाये गये अभियान (4-11 जून, 2016) को दो हिस्सों में बांटा गया। एक स्मार्ट एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ई-रिक्शा द्वारा पूरे शहर में माइकिंग एवं प्री-लोडेड स्मार्ट सिटी गीत से प्रचार किया गया जिसे वार्ड पार्षद श्रीमती रंजू सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दूसरे में पूरे शहर के 10 मुख्य जगहांे पर सामुदायिक सभा आयोजित कर लोगों से स्मार्ट सिटी हेतु फार्म भरवाकर सुझाव लिये गये एवं उन्हें आॅनलाईन वोटिंग करने के तरीकों को समझाया गया ताकि वे अधिक से अधिक वोट करें, परिचर्चा में भाग लें, फेसबुक लाइक करें ताकि अपना शहर स्मार्ट सिटी की वरीयता सूची मे स्थान बना सके। परिणामस्वरूप कुल 1950 लोगों से फाॅर्म द्वारा सुझाव लिये गये एवं नगर निगम को सौंपे गये। 100 आॅनलाइन कमेंट, परिचर्चा एवं 1400 फेसबुक लाइक मिले।

ईकोरिज कंसल्टेंसी के सहायक प्रबंधक (अर्बन), रोहित सिंह प्रिया के लगातार संपर्क में रहे और हर दिन का फीडबैक लेते रहे एवं अपनी रिपोर्ट में उनके कहे अनुसार प्रिया के सुझावों को जगह दी है जैसे – महिला सुरक्षा, पीने का शुद्ध पानी, हर वार्ड में पार्क, अच्छे बड़े, चैड़े और कवर्ड नाले की व्यवस्था, नियमित साफ सफाई, नाला उड़ाही की व्यवस्था, जाम मुक्त सड़क, रियल टाइम सिटी बस सुविधा, जल स्रोतों का संरक्षण एवं उन्न्ातिकरण।

इस अभियान में सामुदायिक सभा करने के दौरान एक और बात सामने आई। लोगों ने कहा कि स्मार्ट सिटी अभियान तो पिछली बार भी चला था प्रचार गाड़ी भी घूमती थी लेकिन हम जैसे अशिक्षित एवं कम समझने वाले लोगों से सुझाव लिये जायें ये पहली बार हो रहा है।

प्रिया के इस अभियान का सबसे बड़ा असर शहरी गरीबों में दिखा। शहरी गरीब भी अब स्मार्ट सिटी का सही मतलब समझने लगे हैं। स्वच्छता पर चर्चा कर रहे हैं एवं इसकी जरूरत समझ रहे हैं।

मीडिया का सहयोग काफी अपेक्षित रहा। अगर नगर निगम के कर्मचारियों एवं वार्ड पार्षदों का भरपूर सहयोग मिला होता तो यह अभियान और भी ज्यादा सफल होता।

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