सहभागी शहरी आकलन—एक अभ्यास

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सहभागी शहरी आकलन—एक अभ्यास

शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता,जल निकासी व कूड़ा प्रबन्धन एक समस्या के रूप में लगभग सभी शहरों में मौजूद है और अधिकांश लोग इस समस्या से जूझ रहें हैं,नगर विकास से जुडे़ विभाग व अन्य हितभागी अपने स्तर से इस दिशा में बेहतरी के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। नगरीय स्वच्छता से जुड़े उपरोक्त मुद्दे पर प्रिया- पार्टीसेपटरी रिसर्च इन एशिया,नई दिल्ली द्वारा जनपद झांसी में स्वच्छता विकास में नागरिक भागीदारी व इनसे जुडे़ अन्य हितभागियों की भूमिका को प्रेरित करने तथा सभी घटकों को एक मंच पर लाने हेतु एक पहल किया जा रहा है,इस पहल का नाम “नागरिक जुड़ाव व जिम्मेदार शहर” है। इस पहल के प्रमुख उद्देश्य निम्न हैं।

प्रमुख उद्देश्य:

  • शहरी क्शेत्र के नागरिकों विशेशतःगरीब तबके के लोगों का क्शमता विकास व उनके विश्वास को बढ़ाना जिससे वे क्शेत्र से जुड़े स्वच्छता,पेयजल के मुद्दे पर पहल कर सकें
  • नागर समाज,नगर निगम व अन्य हितभागीयों का जुड़ाव जिससे सभी मिलकर प्रयास कर सकें,साथ ही किये जाने वाले प्रयासों व नियोजन प्रक्रिया तथा क्रियान्वयन में अभिनव प्रयोगों को शामिल कर सकें।
  • शहरी क्शेत्र के गरीबों की इस प्रकार से नेतृत्व क्शमता का विकास करना जिससे वे शहर के स्वच्छता(सैनीटेशन)योजना निर्माण की तैयारी,देखरेख,क्रियान्वयन में अपनी भागीदारी कर सकें साथ ही साथ वे क्शेत्र के मूलभूत सेवाओं के प्रति मांग कर सकें।
  • शहर के स्तर पर सेटलमेन्ट इम्प्रूवमेन्ट समिति का गठन
  • समुदाय में लोगों के नेतृत्व व पहल करने की क्शमता में बृद्वि
  • नागरिकों तक सूचनाओं की पंहुच को बढ़ावा तथा सूचनाओं की प्राप्ति में सहजीकरण
  • ज्ञान व भागीदारी के आधार पर रचनात्मक कार्यों में नगरनिगम से जुड़ाव व समन्वयन
  • लोगों के नेतृत्व क्शमता के आधार पर विविधता पूर्ण नवीन प्रयोगों,मूल्यों को बढ़ावा
  • युवाओं व महिलाओं की भागीदारी,समावेश में बृद्वि
  • महिला सॅफाईकर्मीयों के मुल्यों,विचारों को स्वच्छता सेवाओं के नियोजन प्रक्रिया व देखरेख में शामिल होना

उपरोक्त उद्देश्यों में से मुख्यतः शहरी क्शेत्र के नागरिकों विशेशतः गरीब तबके के लोगों का क्शमता विकास व उनके विश्वास को बढ़ाना जिससे वे क्शेत्र से जुड़े स्वच्छता,पेयजल के मुद्दे पर पहल कर सकें तथा स्वच्छता(सैनीटेशन)योजना निर्माण की तैयारी,देखरेख में अपनी भूमिका अदा कर सकें, उसकों ध्यान में रखते हुए सहभागी शहरी आकलन प्रक्रिया का संचालन अभ्यास के तौर पर क्शेत्र के एक मलिन बस्ती में किया गया चूंकि शहरी क्शेत्र में विकास के प्रति गरीब नागरिकों की भागीदारी व जुड़ाव हेतु इस प्रक्रिया का संचालन महत्वपूर्ण है लोग संशाधनों की पहचान व क्शेत्र की स्थितियों के बारे में रूचिपूर्ण ढ़ग से अपनी बात रखते हैं,पुरी प्रक्रिया में महिलायें,युवक,पुरूश,बच्चे सभी शामिल होते हैं उन्हें लगता है कि योजना बनाने में वो भी सहयोगी हो सकते है,इस प्रक्रिया से संशाधनों व क्शेत्र की स्थितियों के बारे में अच्छे से जानकारी प्राप्त होती है जिसे सामाजिक नक्शे के तौर पर सूचना व अांकड़ों के रूप में भी एक दस्तावेज के तौर पर रखा जा सकता हैं। किसी सामाजिक प्रक्रिया में लोगों की मौजूदगी लोक भागीदारी को सुनिश्चित करती है। इस लिए इस प्रक्रिया का संचालन महत्वपूर्ण है।

PUA Process-1

मलिन बस्ती की भौगोलिक स्थिति–मलिन बस्ती तालपुरा, झांसी जनपद के सरकारी बस स्टैण्ड के पीछे व गल्ला मण्डी के पास स्थित है,

प्रक्रिया:

सहभागी पद्धति से क्शेत्र की सूचनाओ, जानकारियों, संसाधनों, परिस्थितियों को समझने हेतु सहभागी शहरी आकलन पद्धति को सहायक तरीका मानकर एक अभ्यास किया गया, इसे करने के पूर्व आवश्यक तैयारी की गयी, जिनमे क्शेत्र का चयन, समुदाय के लोगों की भूमिका तथा सहजकर्ता की अपनी तैयारी प्रमुख रूप से शामिल है । शहरी क्शेत्र में नागरिक भागीदारी के साथ 04 मई २०16 को झाँसी जनपद के वार्ड संख्या 08–, तालपुरा मलिन बस्ती में इस प्रक्रिया की शुरुआत की गयी, इस बस्ती में अनुसूचित जाति के लोग जैसे-कोरी,अहिरवार,बरहा,बाल्मिकी आदि निवास करते हैं I बैठक के आरम्भ में  बस्ती के लोगों में उत्सुकता का माहौल दिखा समुदाय से महिलाये,पुरूश,यूवा तथा बच्चों ने भागीदारी करते हुए चर्चा व सामाजिक नक्शा निर्माण में अपने  विचार  रखना शुरु किया, लोगों ने बताया की इस बस्ती के अधिकांश लोग मजदूरी का कार्य करते है,जिसमे बीड़ी बनाना,ठेले लगाना,बेलदारी करना,मकान बनाने में,मजदूरी करना तथा झाड़ू बनाना शामिल है,इस गली को लोग झाड़ू वाली गली भी कहते है,इन कार्यो को करने में माहिलाओ की पूरी भागीदारी रहती है, बीड़ी बनाने में लगी माहिलाओ ने बताया की एक ब्यक्ति एक दिन में जब 1000 बीड़ी बनाता है जिसपर 100 रुपये मजदूरी मिलती है जो कम है,लोगों से शिक्शा के बारे में चर्चा करने पर लोगों ने बताया की पूर्व में बच्चों की  शिक्षा पर कम ध्यान था किन्तु अब  लोग ध्यान देने लगे है,लगभग 01 की० मी० की दूरी पर सरकारी प्राथमिक विद्यालय है तथा 02 की०मी०पर इंटर कालेज है जहां बच्चे ,पैदल पढ़ने जाते हैं,इस दौरान लगभग 15-16 वर्श के 03 लड़कों  ने बताया की वे 08 तक की पढाई करके अब दुकान पर सेल्स मैन की नौकरी करते है जिससे 03–04 हजार रुपये महिने में मिल जाते है,इसलिए शिक्षा में रूचि कम है,आगे लोगों से स्वाथ्य सुविधाओ पर चर्चा करने पर लोगों ने बताया की बीमार या स्वास्थ समस्या होने पर अधिकांश लोग जिला सरकारी अस्पताल  जाते है,कभी-कभी प्राइवेट में भी जाते है,लगभग ०२माह  पूर्व नजदीक में नगरीय स्वास्थ केंद्र खुला है किन्तु डाक्टर नहीं आते इस लिए वहां नहीं जाते हैं , इस कड़ी में स्वछता पर जानकारी देते हुए लोगों ने बताया की इस गली में सभी स्वयं सफाई करते है ,मेन रोड पर ही सफाईकर्मी द्वारा सफाई होती है,आगे समुदाय में यह चर्चा किया गया की सभी को मिलकर बस्ती का एक सामाजिक-संशाधन नक्शा बनाना है ,उदाहरण के तौर पर सरकार  द्वारा 05 वर्शीय योजना निर्माण तथा परिवार में घर चलाने हेतु योजना बनाने की बात सहजकर्ता द्वारा कही गयी, जिसे सुनकर कुछ समय तक लोग चुप हो गए कुछ समय बाद प्रेरित करने पर 01 पुरूष साथी ने हामी भरी जिन्हें पूर्व में  तैयारी के दौरान जिम्मेदारी दी गयी थी और उन्होंने नक़्शे की शुरुआत बस्ती के सड़कों को दर्शाते हुए किया, नक़्शे में  उत्तर दिशा को ऊपर में रखा गया आरम्भ में सहजकर्ता सदस्य को भी सहयोग करना पड़ा, धीरे-धीरे कई लोग प्रक्रिया से जुड़ गए महिलाओ ने भी अपने विचार रखे,मकानों को दर्शाते हुए जब उनसे पूछा गया की क्या सभी मकानों में शौचालय बने हैं,तो एक स्टोरी सामने आयी,लोगों ने बताया की महिला पुरूष दोनों बाहर एक निजी ब्यक्ति के जमीन पर खुले में शौच के लिए जाते हैं,जो की यहाँ से 500 मीटर पर है, आगे लोगों ने बताया की ०6 माह पुर्व लोगों ने एक योजना के तहत अपने आवेदन नगरनिगम में जमा किये थे और घर के अंदर शौचालय बनाने हेतु गढ़े खुदवाए थे किन्तु घर से निकलने वाले रास्ते में गढ़ा कई माह तक बना रहा और उसमे आते जाते परिवार के सदस्य, बच्चे गिरने लगे तो लोगों ने क्शेत्र के पार्षद से पूछा के कब यह बनेगा,उन्होंने मार्च माह तक की बात कही किन्तु जब मार्च में कोई कार्य नहीं हुआ तो लोगो ने गढ़े को बंद करवा दिया,शौचालय अभी तक नहीं बना और लोगों में इसको लेकर काफी नाराजगी है,क्शेत्र में सामुदायिक  शौचालय न होने पर  वे पार्षद व अन्य कर्मचारियों तथा मुख्यमंत्री को दोष दे रहे थे ,इस स्टोरी के बीच सामाजिक नक्शा बनाने का कार्य रूक गया,दुबारा प्रक्रिया शुरु करने में समय लगा,इस बार चर्चा में महिलाये आगे थी और  युवाओ,  बच्चो ने कमान संभाल ली,अब नक़्शे में संसाधनों की गिनती शुरु हो गयी ,लोग आपस में उलझते हुए प्रतीक चिन्ह के साथ आगे बढ़ते गये जिसमे राशन की दुकान,हैंडपंप,मकानों की स्थिति सहित कई जानकारिया जुड़ती गयी, अंत में नक्शा पूर्ण हुआ उसे सबको दिखाया गया और सहजकर्ता टीम द्वारा धन्यवाद के साथ एक समूह ऍस०आई०सी० निर्माण करने की प्रक्रिया के साथ आगे कार्य करने की बात कही गयी और समापन की घोषणा की गयी I

अवलोकन:

  • लोगों का प्रमुख ध्यान आर्थिक उपायों को बढ़ाने में अधिक है,रोजगार एक प्राथमिक मुददा है
  • सामाजिक सुरक्षा व अन्य विकासीय योजनाओ का लाभ न मिलने पर लोगों में शाशन ब्यवस्था के खिलाफ अत्यधिक रोष है जो वार्ता में बाधक है
  • महिलाओं का विशवास  धरना प्रदर्शन,घेराव व रैली में अधिक है   सहजकर्ता टीम से अपेक्षा है की वे त्वरित समस्या समाधान में आगे आयें
  • शिक्षा की अपेक्षा रोजगार में अधिक विशवास

प्रमुख सीख:

  • एक समान समस्याओ पर समुदाय एक जुट होता है और पहल में सहयोगी होता है
  • अच्छे से प्रक्रिया संचालन के पूर्व अत्यधिक तैयारी व समुदाय के साथ विशवास का होना आवश्यक है अन्यथा भटकाव हो सकता है
  • समुदाय के लोगों के विभिन्न प्रशनो पर सहजकर्ता टीम की पूरी तैयारी आवश्यक है

समुदाय की ओर से उठाये गये कुछ प्रशन:

1-समाजवादी पेंशन कैसे प्राप्त होगा

2-लोगों के घरों में शौचालय कैसे व कब बनेगा

3-गरीबी रेखा के निचे के कार्ड कैसे प्राप्त होगा

4-एक महिला ने बताया की वो सफाईकर्मचारी पद से अवकाश ली किन्तु उसे 58 वर्ष में ही जबरदस्ती अवकाश दे दिया गया जबकी 60 वर्ष तक कार्यरत थी,02 वर्ष का कोई भुगतान नहीं मिला,क्या नगरनिगम से धनराशि मिल सकती है

5-रोजगार के अवसर अधिक कैसे प्राप्त होगा

सहभागी शहरी आकलन प्रक्रिया का अन्य गतिविधियों से जुड़ाव–इस प्रकार की गतिविधि से क्षेत्र की आधारभूत सूचनायें प्राप्त होती हैं जिनका उपयोग कांस्ेप्ट नोट में क्षेत्र के पृश्ठभूमि के बारे में तथा किसी सर्वेक्षण के समय पूर्व में इकठ्ठा की गयी जानकारी उपयोगी हो सकती है। प्रक्रिया से प्राप्त जानकारी को लेकर सम्बन्धित सेवा प्रदाता विभागों से मांग की जा सकती है तथा नियोजन में उपयोग किया जा सकता है।

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