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Aakhir kab? Chuppi Todho, Hinsa Roko

The state of Haryana has in the past few months witnessed agitations by the Jat community for reservations. The safety of women has been severly compromised during these organised protests. Why are women targetted and subjected to violence during mass agitations? When will it end? asks Sonia, Assistant Program Officer at PRIA, who works to prevent violence against women and girls in Haryana. Only when women learn to speak out...

राज्य हरियाणा एक ऐसा राज्य है जहाँ पर शुरू से ही पर्दा प्रथा, लिंग भेदभाव और महिला अत्याचार सबसे ज्यादा होता हैI यहाँ पैसा और चौधर का बहुत दबदबा है और ये पैसा और चौधर यहाँ सिर्फ पुरुषो के पास हैI इसी पैसे और चौधर का इस्तेमाल करके यहाँ के लोग आये दिन घिनोनी वारदातो को अंजाम देते हैI यहाँ हर घर में महिलाओ के साथ हिंसा होतीं है चाहे वह गरीब हो या अमीर ,चाहे वह झोपडी में रहती हो या महलो ,चाहे वह अपने घर में रहती हो या कही नोकरी करने जाती हो, यहाँ हर पल हर महिला पर हिंसा होती हैI उन्हें परिवार द्वारा या समाज के लोगो द्वारा शारीरिक और मानसिक हिंसा का शिकार होना पड़ता हैI

ये तो हम सब जानते है की कास्ट ,क्लास ,गरीब और घर से बाहर जाने वाली महिलाओ के साथ हिंसा होती हैI

लेकिन यहाँ पर बड़े –बड़े और सुंदर घरों में कपड़ो और गहनों में बन-सवर कर रहने वाली महिलाये जिन्हें देखकर हम कई बार ये सोचते है कि काश हम भी इसी तरह से रहे हमारे पास भी पैसा जेवर ,सुन्दर कपडे हो I लेकिन उन महलो की ज़िंदगी चार दिवारी, गहनों, कपड़ो में सिमट कर रह गई हैI कभी उन्हें बाहर की दुनिया के बारे में कुछ पता नही चलताI इन महिलाओ के साथ पति द्वारा रेप और मारपीट सबसे ज्यादा होती हैI कभी किसी महिला ने इन सब का विरोध किया तो उसे अपनी जान से ही हाथ धोना पड़ा हैI कब इस मर्डर के केस को ये लोग कब सुसाइड के केस में बदल देते हैं! किसी को कुछ पता नही चलताI

लेकिन जब पैसे और चौधर की बात आती है तो वहाँ भी ये अपने घरों की महिलाओ का इस्तेमाल करते हैंI अभी कुछ दिनों पहले हरियाणा में पंचायत चुनाव हुए थे तो सरकार ने कहा की दसवी तक पढ़ा हुआ ही चुनाव लड़ सकता है और कुछ सीट महिलाओं के लिए आरक्षित थीI जब यहाँ के लोगो के लिए कोई चारा नही बचा तो उन्होंने अपने घरों की महिलाओं को आगे कियाI अपने घरों की बहुओं के घूँघट खोलकर खूब बड़ी –बड़ी पोस्टर छपवाए और पुरे गाँव में चिपकाये लेकिन कभी वोट मांगने तो बहु को नही भेजा वोट मानने तो आदमी आये पोस्टर बहु का शक्ल अपनी दिखाते हुए यही कहते की भाई सरपंची में खड़ा है ध्यान रखना I

ये कभी नही कहा की हमारी बहु या उसके नाम की पहचान दी हो की ये चुनाव लड़ रही हैI इस इ;इलेक्शन मे ज्यादातर महिलाये सरपंच चुन कर आई लेकिन फुल मालाओं से स्वागत उनके पतियों का किया गया I अब फिर से सरपंच बनी महिलाये उन चार दिवारी के अंदर कैद और उनके पतियों पर लग गई सरपंच की मोहर I

अभी हरियाणा में 15 फरवरी को जाट आरक्षण चल रहा था इसमें भी महिलाओ के साथ खूब घिनोनी वारदाते हुई कितने चलती गाड़ियों से महिलाओं को उतार कर रेप और गैंग रेप किये गए ,घरों में घुस कर जबरजस्ती लडकियों को उठाकर ले जाया गया,सरेआम सड़कों पर डीजे बजाकर महिलाओं के साथ छेड़ छाड़ की गई और हमारी पुलिस या सरकार के पास इन सब का कोई रिकोड नही I आरक्षण की आड़ में इन्होने खूब अयाशी और मनमानी की I जिनका पुलिस और सरकार के पास कोई रिकोर्ड नही है I

आरक्षण लेने के लिए लोगो ने अपने घरों की महिलाओ को भी सडको पर उतार दिया वो भी हाथों में हथियार देकर उनके हाथों में थमा दिए गंडासे ,फरसे ,डंडे ,और तलवार और धरने पर सबसे आगे उन्ही को बिठाया कि लो पहले जो कुछ होगा वो तुम्हारे साथ ही होगा I


  • क्या बड़े –बड़े घरों में रहने वाली महिलाये पड़ी लिखी नही होती
  • अगर पढ़ी लिखी होती है तो क्या उनका कोई सपना नही होता की वो बाहर जाकर कुछ काम करे अपनी जिन्दगी अपनी मर्जी से जिए
  • क्या उन्हें ये नही लगता की ये घर उनके लिए जेल है
  • क्या उन्हें ये नही की ये गहने और नये नये कपडे उन पर थोपे गये हैं, की इन्हें पहनो और चुप रहो और समाज के लोगो के सामने दर्द में भी हंसती रहो क्योंकि उन घरों के पुरुषों का इस समाज में चौधर और रुतबा है!
  • जब अपनी चौधर और पैसे के लिए ये लोग अपने घरों की महिलाओं का घुंघट खुलवाकर पोस्टर बना कर गाँव की हर गली हर चौक पर चिपकाते हैं ! यहाँ तक की मिडिया या सडको पर डंडो और गंडासो के साथ बिठा देते हैं !
  • जब महिलाये सरपंच बनती है तो क्या उनके कोई सपने नही होते की उनका भी पूरा गाँव फूलों से स्वागत करे और वो भी अपने मन की बाते पुरे गाँव के सामने रख पाए उसे भी कुछ करने का मोका मिले !लोग उसे जाने!
  • आरक्षण के चलते जब महिलाओं को डंडो और तलवारों को लेकर आगे किया गया तो क्या उन्हें ये नही पता था की उनकी जान भी जा सकती है I
आखिर कब तक चलता रहेगा ये सब ,कब तक हम घुट घुट कर जीती रहेंगी ,कब तक हम अपने सपनो की बली देती रहेंगी ,कब मिलेगा हमे अपनी मर्जी से जीने का अधिकार I
आखिर कब
चुप्पी तोड़ो ,हिसा रोको

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