Home / Feature Story

Feature Story                                

बेटी कैसे बचाएँ ?

आज 24 जनवरी राष्ट्रीय ळप्त्स् ब्भ्प्स्क् दिवस है। दो वर्ष पूर्व भारत सरकार ने ’बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम की इस दिन शुरूआत की थी। बेटी बचाओ, तो बेटी पढ़ाओ - माने बेटी की भ्रूण में हत्या न करो, उसे पैदा होने दो। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान व उत्तर प्रदेश के लोग ही कम बेटियाँ पैदा होने देते हैं।

http://marthafarrellfoundation.org/pdf/Final-Guidelines_BBBP.pdf.pdf

पर बेटी पैदा हो भी गई तो, बेटी पढ़ाओ तो बेटी बचाओ ?
देश के इन्हीं राज्यों में आज भी बेटियों को 18 वर्ष की आयु के पहले ही ब्याह दिया जाता है। अर्थात् बेटी का बोझ ज्यादा दिन क्यों बर्दाश्त किया जाए। हमारे सोनीपत व पानीपत में अनुभव बताते हैं कि यदि बेटियाँ पढ़ती रहें तो उनकी शादी 18 वर्ष की उम्र के बाद ही होती है।

http://marthafarrellfoundation.org/event_view.php?id=77

पिछले डेढ़ वर्ष से हम ’’कदम बढ़ाते चलो’’ ;ज्ञठब्द्ध अभियान देश के 11 स्थानों पर चलाते आ रहे हैं। यह स्थान अधिकांशतः इन्हीं राज्यों में हैं।

http://marthafarrellfoundation.org/Campaigns.html  

इस अभियान में लड़के और लड़कियाँ दोनो आपस में मिलकर अपने जीवन में चल रहे जेंडर भेद-भाव के कारणों को समझने का प्रयास करते हैं।

लड़कियों की जिंदगी में होने वाली हिंसा का विश्लेषण खेल-कूद, नाटक-गाना आदि तरीकों से करते हैं। इन युवा समूहों में 5000 लड़के-लड़कियाँ सक्रिय हैं।

युवा नेतृत्व ने इन सभी 11 स्थानों पर स्कूल/कालेज व मोहल्ला/बस्ती में ’सहभागी सुरक्षा आडिट’ करके लड़कियों की सुरक्षा के तमाम समाधान सुझाए हैं। अधिकांश जगह पर स्कूल के रास्ते और उसके बाहर लड़कियों के साथ छेड़-छाड़ रोजमर्रा की बात हो गई। लड़कियाँ और उनके माँ-बाप उन्हें इस हिंसा के डर से हाइस्कूल व काॅलेज में आगे पढ़ाई करने नहीं भेजते हैं।

1  

ज्ञठब् अभियान के माध्यम से इन युवाओं ने जयपुर, झाँसी, दिल्ली, वाराणसी, सोनीपत, पानीपत, बाँदा, चित्रकूट, सरगूजा, सिलीगुड़ी, पटना व कालिंपोंग में बेटियों के पढ़ने और घूमने का भय-मुक्त माहौल बनाने में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। तो आज के दिन ’बेटी बचाओ’ की सफलता के लिए ’बेटा समझाओ’ कार्यक्रम भी चलाना पडे़गा। परिवार, समाज व स्कूलों में बेटों को बेटियों के प्रति अपनी सोच में बदलाव सिखाना पड़ेगा।

बेटी-बेटा साथ पढं़े और खेलें, तब संभवतः दोनो ही बचेंगे और पढ़ंेगे।

राजेश टंडन
24 जनवरी 2017

Feature Story